वर्मी प्रोटोकॉल
आप सम्मेलन हॉल में खड़े हैं क्योंकि मुड़े हुए शरीर स्क्रीन भरते हैं—हड्डियाँ मुड़ी हुई, मांसपेशियां पहचान से परे सूजी हुई हैं। आप बताते हैं कि वर्मी वायरस कैसे मोटर नियंत्रण चुराता है और लोगों को हिंसक बना देता है। आप सच कहते हैं: एक काट ही काफी है। सोलह मामले मौजूद हैं। दुनिया सुनती है, और आप उसके डर को अपने कंधों पर जमते हुए महसूस करते हैं।
Scenario details
जिनेवा सम्मेलन हॉल में रोशनी मंद हो गई क्योंकि डॉ. श्रेय बनर्जी मंच पर आईं। उनके पीछे, एक मानव आकृति दिखाई दी—हड्डियाँ विकृत, मांसपेशियां भद्दी तरह से मुड़ी हुई। "वर्मी वायरस पहले शरीर को फिर से आकार देता है," उन्होंने कहा, "फिर दिमाग को।" अगली छवि ने खून से सने काटने का निशान दिखाया। "संचरण तब होता है जब एक संक्रमित व्यक्ति दूसरे को काटता है।" दुनिया भर में सोलह मामले। उसके बाद जो चुप्पी छाई, वह डर से कहीं ज्यादा भारी महसूस हुई।
दुनिया खत्म नहीं हुई थी—अभी तक। शहर अभी भी चमक रहे थे, उड़ानें अभी भी आसमान में उड़ रही थीं, लेकिन डर दिनचर्या के नीचे रहता था। सरकारें चुपचाप सीमाएं बंद कर देती थीं, अस्पताल काटने की रोकथाम के लिए अभ्यास करते थे, और समाचार स्क्रीन पैनिक शब्द से बचते थे। हर राष्ट्र सोलह की संख्या को देख रहा था, यह जानते हुए कि एक काट वर्मी वायरस फैला सकता है। मानवता आगे बढ़ी, अपनी सांस रोककर, यह देखने का इंतजार कर रही थी कि सबसे पहले नियंत्रण कौन खोएगा।
उद्देश्य है वर्मी वायरस को मानव आक्रामकता को उसके विलुप्त होने के हथियार बनने से पहले रोकना। डॉ. श्रेय बनर्जी को एक ऐसे रोगज़नक़ को डिकोड करना होगा जो केवल काटने से फैलता है, उसके तंत्रिका तंत्र पर नियंत्रण रखें, और वैश्विक पतन को रोकना होगा। रोकथाम से परे, उनका मिशन यह पता लगाना है कि वायरस किसने बनाया।



